NKP “भूगोल विषय के विद्यार्थियों में प्राकृतिक आपदाओं, कोरोना महामारी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का अध्ययन।”
प्रथम अध्याय - समस्या एवं उसका आविर्भाव 1.1 प्रस्तावना पर्यावरण के असन्तुलन के कारण प्राकृतिक स्वरूप में होने वाले अकस्मात ऐसे परिवर्तन जो मानव को विपत्ति में डाल देते है तथा जिनसे व्यापक स्तर पर जन-धन की हानि होती है। इनसे बचने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय व प्रबन्धन करता है, उसे आपदा प्रबन्धन कहते है। मानव द्वारा किये गये प्रबन्धन होते है। प्राकृतिक आपदाये मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। आपदा घटने के उपरान्त सर्वत्र विनाश, दुर्दशा तथा संत्रास का दृश्य उत्पन्न हो जाता हैं। मानव अपनी तीक्ष्ण बुद्धि के बल पर तकनिकी साधनों एवं विज्ञान की सहायता से मानों सम्पूर्ण भूमण्डल पर अपना प्रभुत्व जमा लिया हैं। आदिकालीन मानव ने प्रकृति के साथ सौहार्दता एवं प्रेम का व्यवहार ही किया, क्योंकि तब वह प्राकृतिक परिवेश मे ही अपना जीवनयापन करता था परन्तु वर्तमान में मानव आबादी का विस्तार होने के साथ-साथ, शहरीकरण, औधोगिकरण एवं ऐसे ही क्रियाकलाप चरम स्थिति पर पहुचने लगे और इसी से आपदाओं का जन्म हुआ । प्राकृतिक आपदाओं के सामने मानव की विवशता सदियों से बनी हुई हैं प्राकृतिक आपदाओं को जन्म...