महिला सशक्तिकरण रीना शर्मा
महिला सशक्तिकरण में सोशल मीडिया की भूमिका
रीना शर्मा
शोधकर्ती
समाजशास्त्र
ज्योति विद्यापीठ महिला महाविद्यालय, जयपुर
सारांश :- आज का युग सोशल मीडिया का युग है जिसकी उपस्थिति और सक्रिय भागीदारी ने महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए विचारधाराओं को तेजी से एवं व्यापक रूप से फैलाया है। सोशल मीडिया सामाजिक परिवर्तन का एजेंट बन गया है जिसने विभिन्न पहलुओं जैसे कि महिला सशक्तिकरण में मदद और समर्थन किया है वर्तमान में महिलाओं के अधिकारों और दुनिया भर में भेदभाव और रूढ़ियों को चुनौती देते हुए गौरवशाली समुदाय का ध्यान आकर्षित करने में सोशल मीडिया का एक महत्वपूर्ण स्थान है, सोशल मीडिया ने ऑनलाइन समुदाय के माध्यम से महिलाओं की समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए एक मंच दिया है। सोशल मीडिया ने महिलाओं को सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और वित्तीय जैसे कई गुना सशक्त बनाया है प्रस्तुत लेख में इस बात पर चर्चा होगी कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सोशल मीडिया कैसे उपयोगी होता है एवं किस प्रकार महिलाएं सुरक्षित एवं स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया का उपयोग कर सकती है और सोशल मीडिया के प्रति महिलाओं की सक्रियता पर भी चर्चा की जाएगी। सोशल मीडिया की महिलाओं के प्रति भागीदारी की सकारात्मक एवं नकारात्मक पहलुओं की भी चर्चा की जाएगी।
मूल शब्द:- सोशल मीडिया, महिलाएं, सशक्तिकरण, समाज, बदलाव, भागीदारी।
प्रस्तावना:- सोशल मीडिया दो शब्दों का मेल है, सोशल एवं मीडिया। जिसका अर्थ है सामाजिक बातचीत करना, संवाद करना। अन्य लोगों की जानकारी प्राप्त करना एवं उस पर प्रतिक्रिया देना जिसका माध्यम संचार है एवं इलेक्ट्रॉनिक संचार है। मीडिया को समाज का एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है। आधुनिक समय में यह समाज की बड़ी शक्ति बन गई है। जो समाज पर अपना गहरा प्रभाव डाल रही है। सोशल मीडिया आज समाज में जानकारी का एक बड़े पैमाने का स्रोत बन गया है। सोशल मीडिया महिलाओं के विकास एवं जनसंचार के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज के इस आधुनिक युग में नारी सशक्तिकरण का मार्ग अपना रही है, जिससे उस उनकी मानसिकता का विकास हो रहा है तथा वह शिक्षा की तरफ काफी आकर्षित हो रही है। महिला के इस विकास में सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आधुनिक दौर में महिलाओं को जागरूक बनाने में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। सोशल मीडिया महिलाओं को एक इलेक्ट्रॉनिक मंच प्रदान करता है जिससे विचारों का आदान-प्रदान हो सके। एवं महिला अपनी बात समाज के सामने रख सके।
सोशल मीडिया के विभिन्न प्रकार:- जैसा कि सोशल मीडिया एक इलेक्ट्रॉनिक मंच है, जो महिलाओं के विकास में भी एक बहुत बड़े पैमाने पर भागीदारी बनाए हुए हैं, जिसके द्वारा एक आभासी वैश्विक समुदाय विकसित हो रहा है, जिसका माध्यम है कुछ सोशल नेटवर्किंग साइट्स एवं मीडिया जो इस प्रकार हैं:-
फेसबुक, इंस्टाग्राम, वीचैट, व्हाट्सएप, स्काइप, टेलीग्राम, वाइबर आदि।
विकीपीडिया, माइक्रोब्लॉग, और ब्लॉग, ट्विटर, सोशल बुकमार्क
यूट्यूब, टिकटॉक, स्नैपचैट, वर्चुअल गेम वर्ल्ड साइट्स
अध्ययन के उद्देश्य:-
महिला सशक्तिकरण में सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका का अध्ययन करना।
सोशल मीडिया के प्रति महिलाओं की जागरूकता का पता लगाना।
सोशल मीडिया के महिलाओं पर बढ़ते सकारात्मक एवं नकारात्मक पहलुओं को जानना।
महिला सशक्तिकरण एवं मीडिया:-
पिछले कुछ दशकों में स्थानीय एवं वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया ने संचार को बड़े पैमाने पर बदल दिया है। भारत में कुछ दशक में सोशल मीडिया के अभ्यास एवं उपयोग में वृद्धि हुई है। सोशल मीडिया विचारों को प्रेषित करने का सुगम माध्यम है, जिससे हम विचारों का आदान प्रदान कर सामाजिक प्रतिक्रिया भी तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। जिससे हमारी सोच की नई दिशा प्राप्त होती है। हमारी सोच का दायरा बढ़ने लगता है तथा हम एक नई दुनिया में प्रवेश करते हैं। सोशल मीडिया से सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक गतिविधियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होता है। सोशल मीडिया महिलाओं के लिए चर्चा करने, संवाद करने, उनकी आवाज सुनने का मंच एवं ऑनलाइन सक्रियता को व्यवस्थित करने का एक उपकरण है। सामाजिक मीडिया एक व्यापक प्रवृत्ति और व्यापक मांग के लिए एक शक्तिशाली चैनल है, जो स्थानीय एवं वैश्विक समुदाय का ध्यान केंद्रित कर महिलाओं के सही मुद्दे को प्रेषित एवं प्रोत्साहित करती है।
आज सोशल मीडिया ने अनेक महिलाओं को उनके अस्तित्व से परिचित करवाया है। वह महिला जो डरी दबी एवं सहमी सी जिंदगी जी रही थी, वो सोशल मीडिया द्वारा खुद को एक मुकाम पर पाती है एवं अपनी प्रतिभा से परिचित होती है। आज एक महिला यदि आवाज उठाती है तो उसकी गूंज दूर तक जाती है, जिसका कारण है सोशल मीडिया। कई महिलाएं वर्तमान में प्रमुख पदों पर है इसमें मीडिया की अहम भूमिका है। महिलाओं के मुद्दे कभी भी इतनी चर्चाओं में नहीं होते थे, जितने कि आज है। यह सोशल मीडिया के कारण ही है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है इसकी महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका है। यह महिलाओं के आत्मविश्वास पैदा करने का काम करता है। आज सोशल मीडिया ने महिलाओं की सोच में बदलाव ला दिया है।
सोशल मीडिया के प्रति महिलाओं की जागरूकता:-
सोशल मीडिया, जो हमारी जिंदगी का अब एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यह एक टेक्नोलॉजी की देन है। खास बात तो यह है कि सोशल मीडिया में पुरुष एवं महिला में समानता है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल जितना पुरुष करते हैं उतना ही महिलाएं भी करती है। सोशल मीडिया के जरिए महिलाएं खुद को ही नहीं वरन् अन्य महिलाओं को भी सशक्त कर रही है। महिलाएं अपनी उपलब्धियों को सोशल मीडिया पर शेयर करती है, तो उसे देश अन्य महिलाएं भी आगे बढ़ने का प्रयास करती है। सोशल मीडिया से महिलाएं समाज में हो रहे बदलाव को भी जान सकती है। सोशल मीडिया से महिलाएं अपने ज्ञान और अनुभवों को बढ़ा कर स्वयं को सशक्त बना रही है। सोशल मीडिया महिलाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान करता है, जिससे वह सशक्त बन सके। सोशल मीडिया से महिलाएं नई कंपनियां, नये उद्यम की शुरुआत भी कर सकती है। आज सोशल मीडिया के माध्यम से देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों में बतौर महिला इंजीनियर घर बैठे कंप्यूटर से काम कर रही है।
सोशल मीडिया के सकारात्मक एवं नकारात्मक पहलू:-
जैसा कि हम जानते हैं कि प्रत्येक वस्तु के दो पहलू होते हैं, सकारात्मक एवं नकारात्मक। इसी प्रकार सोशल मीडिया के भी महिलाओं के लिए दोनों पहलुओं को देखा जा सकता है। जिस प्रकार सोशल मीडिया महिला की आवाज ऊंची उठाता है तथा आगे बढ़ने में मदद करता है। उसी प्रकार असुरक्षा का खतरा भी रहता है।
सोशल मीडिया से साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ जाता है। महिलाओं का मानसिक शोषण का खतरा भी बढ़ जाता है। कहीं-कहीं सोशल मीडिया द्वारा महिलाओं को इंसाफ भी मिलता है तो दूसरी तरफ मीडिया द्वारा यौन शोषण का खतरा भी बढ़ जाता है। सोशल मीडिया कहीं ना कहीं समय भी खराब करता है। महानगरीय तथा राज्यों की राजधानियों में जोखिमों को बढ़ता देखा जा सकता है, उसी प्रकार सोशल मीडिया पर भी कुछ जोखिम होते हैं जिनसे बचकर निकलना भी महिलाओं के लिए आवश्यक होता है। फेसबुक एवं ट्विटर जैसी साइट्स पर पुरुषों द्वारा अभद्रता का उपयोग भी महिलाओं के मानसिक शोषण का कारण बनता है।
निष्कर्ष:-
सोशल मीडिया समुदाय या व्यक्तियों के विचारों एवं भावनाओं का आदान प्रदान करने के लिए एक मंच है। सोशल मीडिया में महिलाओं के व्यवहार को परिभाषित किया गया है। इस अध्ययन के पश्चात यह कहा जा सकता है कि सोशल साइट्स पर महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है। महिलाओं को सोशल मीडिया के जरिए रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। जिससे महिला स्वयं को सशक्त बना रही है। सोशल मीडिया द्वारा महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ रहा है। महिलाएं भी सोशल मीडिया के माध्यम से समाज की रूढ़िवादिता को कम करने की कोशिश कर रही है। तथा समाज बदलाव लाने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया महिलाओं की प्रगति में सहायक बन रहा है। तथा सोशल मीडिया के माध्यम से महिलाएं राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने में सक्षम हो रही है। साथ ही यह कह सकते हैं कि हमें सोशल मीडिया पर महिलाओं को सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए जिससे उनकी प्रगति में बाधा ना हो।
संदर्भ ग्रंथ:-
Social Media and Women Empowerment - Madhu Kumari.
Social Media and Women: A Critical Evaluation of the Behavioural Disconnect- B.K.Ravi.
Role of Media in Empowering Women - Premlata and Tanuja Jukariya.
Media's role in empowering of women in India - SMT.G.Padmaja H.O.D. department of political science.
Comments
Post a Comment