वन्दे मातरम् (मूल पाठ)

 वन्दे मातरम् पर सामान्य जानकारी 

Dr N. K. Pareek 

वन्दे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसकी रचना बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत संस्कृत एवं बांग्ला मिश्रित भाषा में रचित है और मूल रूप से आनन्दमठ में प्रकाशित हुआ था।

वन्दे मातरम् (मूल पाठ)

वन्दे मातरम्।

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,

शस्यश्यामलां मातरम्।

वन्दे मातरम्॥

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्।

सुहासिनीं सुमधुरभाषिणीम्,

सुखदां वरदां मातरम्॥

वन्दे मातरम्॥

सप्तकोटिकण्ठ-कलकल-निनाद-कराले,

द्विसप्तकोटिभुजैर्धृत-खरकरवाले।

के बोले मा! तुमि अबले?

बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं,

रिपुदलवारिणीं मातरम्॥

वन्दे मातरम्॥

तुमि विद्या, तुमि धर्म,

तुमि हृदि, तुमि मर्म,

त्वं हि प्राणा शरीरे।

बाहुते तुमि मा शक्ति,

हृदये तुमि मा भक्ति,

तोमारई प्रतिमा गढ़ि मन्दिरे-मन्दिरे॥

वन्दे मातरम्॥

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,

कमला कमलदलविहारिणी,

वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वाम्।

नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,

सुजलां सुफलां मातरम्॥

वन्दे मातरम्॥

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,

धरणीं भरणीं मातरम्॥

वन्दे मातरम्॥

सम्पूर्ण गीत का सरल अर्थ

प्रथम अंतरा

हे मातृभूमि! मैं आपको प्रणाम करता हूँ। आप जल, फल और अन्न से परिपूर्ण हैं। आपकी शीतल वायु और हरियाली जीवन को सुखद बनाती है।

द्वितीय अंतरा

आपकी चाँदनी रातें, खिले हुए फूलों से सजे वृक्ष, मधुर मुस्कान और मीठी वाणी मन को आनंद देती हैं। आप सुख और आशीर्वाद प्रदान करने वाली हैं।

तृतीय अंतरा

करोड़ों लोगों की आवाज़ और उनकी शक्तिशाली भुजाएँ आपकी सामर्थ्य का प्रतीक हैं। कोई आपको निर्बल कैसे कह सकता है? आप अपने बच्चों को संकट से उबारने और शत्रुओं का नाश करने वाली हैं।

चतुर्थ अंतरा

आप ही ज्ञान हैं, आप ही धर्म हैं, आप ही हृदय और जीवन का सार हैं। शरीर की शक्ति और मन की भक्ति दोनों आपसे ही प्राप्त होती हैं। मंदिरों में आपकी ही प्रतिमा स्थापित की जाती है।

पंचम अंतरा

आप दुर्गा के समान शक्तिशाली, लक्ष्मी के समान समृद्धि देने वाली और सरस्वती के समान ज्ञान प्रदान करने वाली हैं। आप निर्मल, अनुपम और कल्याणकारी माता हैं।

षष्ठ अंतरा

आप हरियाली से युक्त, सरल, सुंदर मुस्कान वाली और सम्पूर्ण संसार का पालन-पोषण करने वाली माँ हैं। मैं आपको बार-बार नमन करता हूँ।

भावार्थ

“वन्दे मातरम्” में भारत माता की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्धि, शक्ति, ज्ञान, करुणा और मातृत्व का गुणगान किया गया है। यह गीत देशप्रेम, राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना को जागृत करता है।



वन्दे मातरम् गीत के रचयिता बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय हैं। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनन्दमठ में संकलित है। सामान्यतः राष्ट्रीय गीत के रूप में इसके प्रथम दो अंतरे गाए जाते हैं, किन्तु मूल गीत में कुल छह अंतरे हैं।


वन्दे मातरम् (छह अंतरे)


1. प्रथम अंतरा

वन्दे मातरम्।

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,

शस्यश्यामलां मातरम्।

वन्दे मातरम्॥


अर्थ:

हे मातृभूमि! मैं आपको नमन करता हूँ। आप जल, फल और अन्न से सम्पन्न हैं तथा शीतल और सुखद वायु प्रदान करती हैं।


2. द्वितीय अंतरा

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्।

सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,

सुखदां वरदां मातरम्॥


अर्थ:

हे माँ! आपकी चाँदनी रातें, पुष्पों से लदे वृक्ष, मधुर वाणी और मुस्कान मन को आनंदित करती हैं। आप सुख और वरदान देने वाली हैं।


3. तृतीय अंतरा

सप्तकोटि कण्ठ कलकल निनाद कराले,

द्विसप्तकोटि भुजैर्धृत खरकरवाले।

के बोले मा! तुमि अबले?

बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं,

रिपुदलवारिणीं मातरम्॥


अर्थ:

करोड़ों कंठों की आवाज़ और करोड़ों भुजाओं की शक्ति से युक्त यह मातृभूमि कभी निर्बल नहीं हो सकती। वह शत्रुओं का नाश करने वाली और रक्षा करने वाली है।



4. चतुर्थ अंतरा

तुमि विद्या, तुमि धर्म,

तुमि हृदि, तुमि मर्म।

त्वं हि प्राणा शरीरे।

बाहुते तुमि मा शक्ति,

हृदये तुमि मा भक्ति,

तोमारई प्रतिमा गढ़ि मन्दिरे-मन्दिरे॥


अर्थ:

हे माँ! आप ही ज्ञान, धर्म, हृदय और जीवन का सार हैं। आप ही शक्ति और भक्ति का स्रोत हैं, और मंदिरों में आपकी ही प्रतिमा की पूजा होती है।


5. पंचम अंतरा

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,

कमला कमलदलविहारिणी।

वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वाम्।

नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,

सुजलाम् सुफलाम् मातरम्॥


अर्थ:

हे माँ! आप दुर्गा के समान शक्ति स्वरूपा, लक्ष्मी के समान समृद्धि देने वाली और सरस्वती के समान ज्ञान प्रदान करने वाली हैं।


6. षष्ठ अंतरा

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,

धरणीं भरणीं मातरम्।

वन्दे मातरम्॥


अर्थ:

हे मातृभूमि! आप हरियाली से आच्छादित, सरल, सुंदर मुस्कान से युक्त तथा समस्त जीवों का पालन-पोषण करने वाली हैं। मैं आपको बार-बार प्रणाम करता हूँ।


संक्षिप्त भावार्थ


वन्दे मातरम् भारत माता की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्धि, शक्ति, ज्ञान, करुणा और मातृत्व का स्तुतिगान है। इसमें मातृभूमि को देवी स्वरूप मानकर उसकी वंदना की गई है और देशभक्ति की भावना को व्यक्त किया गया है।

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